कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने गुरूवार सुबह केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव से दिल्ली स्थित उनके आवास पर मुलाकात की। इस दौरान कृषि मंत्री ने रणथंभौर और करौली क्षेत्र में त्रुटिपूर्ण CTH (Critical Tiger Habitat) का दुबारा सर्वे करवाने की मांग की। उन्होंने CTH और बफर को अलग-अलग नोटिफाइड करवाने के लिए केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्री को ज्ञापन सौंपा। केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री को सौंपा ज्ञापन
ज्ञापन में कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने बताया कि उन्होंने सवाई माधोपुर, करौली व अलवर का भ्रमण किया। इस दौरान स्थानीय लोगों ने विशेषकर वनाधिकारियों की कार्यशैली की शिकायत की है। भम्रण के दौरान एक तथ्य सामने आया है कि वनाधिकारियों ने CTH को ग़लत तरीके से अधिसूचित करवाया है। कृषि मंत्री ने रणथंभौर और करौली क्षेत्र में त्रुटिपूर्ण CTH (Critical Tiger Habitat) का दुबारा सर्वे करवाने की मांग की। उन्होंने CTH और बफर को अलग अलग नोटिफाइड करवाने की मांग की है। जिससे रणथंभौर के आसपास स्थित गांवों में रहने वाले लोगों के अधिकारों का हनन नहीं हो। इसी के साथ ही रणथंभौर में पर्यटन नई ऊंचाइयों को छू सके। जिस पर केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने तुरंत एक्शन लेते हुए डीजी फारेस्ट के साथ एक मीटिंग आयोजित करवाई। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री ने अपने निजी सहायक को बुलाकर जल्द ही स्वयं रणथंभौर का कार्यक्रम बनाने के निर्देश दिए। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री यादव ने रणथंभौर में एक बड़ा जनसुनवाई कार्यक्रम आयोजित कर यहां की समस्याओं के समाधान जल्द करने के निर्देश दिए।
