स्वायत्त शासन विभाग ने शुक्रवार को राजधानी के दोनों नगर निगम हेरिटेज और ग्रेटर को मिलाते हुए एक कर दिया। साथ ही नगर निगम में 80 गांव मिलाते हुए इसका दायरा भी बढ़ा दिया। शहर की सीमा में यह बदलाव 30 साल बाद हुआ है। इसके चलते गांवों के 1.54 लाख लोग शहरी सीमा में आ गए। हालांकि वार्डों की संख्या 250 की जगह 150 होगी। यानी 100 वार्ड खत्म कर दिए जाएंगे। दोनों निगमों को एक करने के बाद अब माना जा रहा है कि आगामी छह माह बाद निगम चुनाव हो सकते हैं। तब तक ग्रेटर और हेरिटेज निगम की व्यवस्था लागू रहेगी। दोनों निगम मेयर काम करते रहेंगे। जयपुर नगर निगम का परिसीमन वर्ष 2011 की जनसंख्या के आधार से किया गया है। स्वायत्त शासन विभाग ने शहर से लगते 27 ग्राम पंचायतों के 1 लाख 54 हजार 840 आबादी वाले 80 राजस्व गांवों को निगम सीमा में शामिल किया है। अब एक वार्ड 18 से 24 हजार की आबादी पर होगा। पहले 9 हजार से 12 हजार की जनसंख्या पर था। जयपुर में एक निगम-एक मेयर की कवायद के चलते नगरीय सीमा में 80 राजस्व ग्राम जोड़ने के बाद 150 वार्डों की बाउंड्री का निर्धारण हो गया है। पहले चरण में परिसीमन पूरा हो गया है। अब इसके लिए आपत्तियां मांगी गई हैं। इसमें कम से कम दो माह लगेंगे। हर विधानसभा में कितने वार्ड यह भी तय जयपुर निगम 150 वार्डों का होगा। महापौर, उप महापौर भी एक-एक होंगे। पार्षदों की संख्या 100 कम हो जाएगी। शहर में 10 विधानसभा क्षेत्रों में कितने-कितने वार्ड होंगे इसका प्रस्ताव भी तैयार है। विद्याधर नगर विधानसभा में सर्वाधिक 22 वार्ड और आमेर विधानसभा में तीन वार्ड बनेंगे। असर… अब 9 की बजाय 24 हजार आबादी वाले वार्ड होंगे आबादी; अभी- वार्डों की जनसंख्या 9000 से 13000 के बीच है। अब- 18 हजार से 24 हजार हो जाएगी। एरिया… अभी- तीन से चार किलोमीटर के बीच एक वार्ड की बसावट है। अब-नए परिसीमन के बाद वार्ड 8 से 15 किलोमीटर तक फैल जाएंगे। राजनीति… अभी-आदर्शनगर विधानसभा, किशनपोल, हवामहल और सिविल लाइंस विधानसभा में अभी भाजपा और कांग्रेस बराबर की स्थिति में है। अब-नए परिसीमन के बाद किशनपोल और आदर्शनगर में भी भाजपा मजबूत होगी। 1995 में पहली बार बना था निगम बोर्ड 1995 में पहली बार नगर निगम बोर्ड बनाया गया था। तब 60 वार्ड थे। इसके बाद 64 वार्ड बनाए गए। कुछ समय बाद 70 वार्ड बनाए गए। इसके बाद 7 वार्ड बढ़ाकर 77 किए गए। वर्ष 2019 में 91 वार्ड थे। 2018 में कांग्रेस सरकार ने दो निगम बनाकर एक साथ 250 वार्ड बना दिए। ग्रेटर में 150 व हेरिटेज में 100 वार्ड। अब भाजपा सरकार ने निगम का दायरा बढ़ाया, लेकिन दोनों निगमों को एक कर 150 वार्ड बनाने जा रही है। ये राजस्व गांव जयपुर शहर में हुए शामिल; जयपुर उपखंड के सरना डूंगर, बावड़ी, लालचंदपुरा, हाथोज, बीड हाथोज, नारी का बास, पीथावास, मांचवा, पिंडोलाई, सबरामपुरा, निवारू, बोयतावाला, मंशारामपुरा, विजयपुरा, सुमेल, रूपा की नांगल, मालपुरा डूंगर, मालपुरा चौर, बल्लूपुरा, बीरमलपुरा उर्फ मुकुंदपुरा, बगराना (जनसंख्या- 69782) सांगानेर उपखंड क्षेत्र के मुहाना, मदाउ, बाढ़ मोहनपुरा, जगतश्रवणपुरा, मोहनपुरा, पीपलाभरतसिंह, जगन्नाथपुरा, महासिंहपुरा उर्फ केश्यावाला, रातल्या, मनोहरीयावाला, विधानी, मंथुरावाला, रामचंदपुरा, सालिगरापुरा, श्रीकिशनुपरा, विमलपुरा, जयचंदपुरा, दातली, चतरपुरा, सीस्यावास, गोनेर, बीलवाकला, लक्ष्मीपुरा, प्रहलादपुरा, श्रीराम की नांगल, लक्ष्मीपुरा उर्फ नाटनीवाला, आशावाला, बाडश्योपुर, जयसिंहपुरा बास बीलवा, सुखदेवपुरा उर्फ नोहरा, खेड़ी गोकुलपुरा, बक्शावाला, ग्वार ब्राह्मणान, श्योसिंहपुरा उर्फ कल्लावाला, जयसिंहपुरा, चकहरवंशपुरा, हरवंशपुरा, नरोत्तमपुरा, बड़ी का बास, खुसर, मुरलीपुरा उर्फ मिश्रा का बाढ़, रामपुरा उर्फ कंवरपुरा, सुखदेवपुरा उर्फ नाटानीवाला, सिरोली, चक सालिगरामपुरा, जयसिंहपुरा बास, जिरोता, खेतापुरा, बदनपुरा। (जनसंख्या- 69713) आमेर उपखंड के किशनपुरा उर्फ लालावास, आकेड़ा डूंगर, जैसल्या, मयला बाग, अखेपुरा, लक्ष्मीनारायणपुरा, शिस्यावास, बड़ागांव जरख्या (जनसंख्या- 15002) जयपुर एक था, एक ही रहेगा : सौम्या मेयर सौम्या गुर्जर ने अच्छा फैसला बताया। मेयर का कहना है कि जयपुर एक था और एक रहेगा। जयपुर को कांग्रेस ने बांट दिया था। सरकार ने सही निर्णय लिया है। एक निगम जयपुर की जरूरत : कुसुम मेयर कुसुम यादव ने दोनों निगमों को एक होने पर खुशी जताई है। जयपुर शहर का एक होना बहुत जरूरी है, क्योंकि जयपुर में हेरिटेज और आधुनिक शहर का समावेश है।