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प्रदेश में राज किसी पार्टी का हो, तबादलों में दामपंथ का बोलबाला रहने के आरोप हमेशा लगते रहे हैं। सत्ताधारी पार्टी के पूर्वी राजस्थान से जुड़े एक नेता भी तबादलों को लेकर दामपंथ के फेर में आ गए। एडवांस लेकर बदले में काम नहीं करने को दुनियाभर में गलत ही माना जाएगा। नेताजी ने एक शिक्षक से अग्रिम सेवा शुल्क ले लिया, लेकिन काम नहीं हुआ। जागरूक शिक्षक ने एक दिन नेताजी से तकादा किया तो वे लंबी चौड़ी बातें करने लगे। अब इन सब बातों का ऑडियो सियासी गलियारों में खूब सुना जा रहा है। ऑडियो वाले नेताजी सत्ता वाली पार्टी में गांवों वाले प्रकोष्ठ में बड़े पद पर हैं। पहले खेती किसानी वाले मोर्चे में थे। विरोधियों ने नेताजी का ऑडियो कई जगह पहुंचा दिया है। विपक्षी पार्टी के बड़े नेता पर महिला के गंभीर आरोप और सियासत सटे हुए राज्यों की सियासत में कई मुद्दे साझा हो जाते हैं। एक राज्य का मुद्दा कई बार दूसरे राज्य की सियासत पर भी असर डाल सकता है। विपक्षी पार्टी के एक बड़े नेताजी पर पड़ोसी राज्य की महिला ने कैमरे के सामने गंभीर आरोप लगाए तो वहां की सियासत गर्मा गई। पड़ोसी राज्य में हुई एक बड़ी गिरफ्तारी के बाद वहां कई तरह की चर्चाएं हैं। वहां की सत्तावाली पार्टी भी नेताजी के आरोपों का वीडियो शेयर कर रही है। विपक्षी पार्टी में बड़े नेताजी के विरोधी सक्रिय हो गए हैं। नेताजी के पास राजस्थान में बड़ी जिम्मेदारी है। आरोपों का वीडियो हाईकमान तक भी भेजा गया है। मंत्री को दर्द मिटाने और फिटनेस की चिंता सत्ता की रेस में बने रहने के लिए फिट रहना सबसे जरूरी है। शरीर साथ देगा तभी तो बाकी चीजें होंगी। पहली बार बने देहाती मिजाज वाले मंत्रीजी को कई दिनों से फिटनेस की चिंता सता रही है। मंत्रीजी को पिछले दिनों से घुटने का दर्द सता रहा है। अब मंत्री को दर्द हो तो दर्द की दवा से लेकर दुआओं तक की कहां कमी रहती है? हर कोई अपना अपना नुस्खा लेकर आ रहा है। मंत्री की पेरशानी है कि वे किसे माने और किसे नहीं? किसी शुभचिंतक ने सलाह दी कि नीम हकीम खतरा ए जान की कहावत तो सुनी ही होगी, ज्यादा लाल बुझक्क्ड़ों की सलाह मानी तो दर्द मिटना तो दूर दूसरी बीमारी और हो जाएगी। उसके बाद से मंत्री अब फिजियोथैरेपिस्ट और अच्छे डॉक्टर्स की राय ही मान रहे हैं। सुना है मंत्रीजी फिट होकर ही मानेंगे, इसलिए आजकल नियमित एक्सरसाइज शुरू कर दी है। सिफारिश नहीं मानी तो परेशान हुए बड़े सत्ताधारी नेता सरकार को कमाकर देने वालों में चरैवेति चरैवेति स्लोगन वाला महकमा भी आगे रहता है। इस बार महकमे ने कमाई अच्छी की, लेकिन मसला कमाई से ज्यादा सत्ता वाले नेताओं की सिफारिशें नहीं मानने का है। पिछले दिनों से कई बड़े नेताओं ने महकमे के अफसरों की शिकायतें की हैं। सत्ता वाले नेताओं का दर्द था कि महकमे ने गाड़ियों के लाखों रुपए की पैनल्टी लगा दी। चालान बना दिए गए। जब सिफारिश की तो उनकी एक नहीं सुनी गई। अब सत्ता में रहते हुए बड़े नेताओं की नहीं चले तो दर्द फूटना स्वाभाविक है। बड़े नेताओं के कई समर्थक और नजदीकियों के कार्गो वाहनों के इस बार मार्च में खूब चलाना हुए। अब तक सिफारिश लगाकर बच जाते थे। लेकिन इस बार किसी की एक न चली, शायद कमाई के मामले में महकमे को समझौता नहीं करने के सिग्नल मिल गए होंगे। बैठक से नदारद क्यों रहे तेजतर्रार अफसर? एक तेजतर्रार अफसर मौजूद हो या गैर मौजूद, दोनों ही वजहों से चर्चा में रहते हैं। पिछली बार अफसर बैठक की वजह से चर्चा में थे। इस बार चर्चित अफसर हाई लेवल की बैठक से नदारद रहकर चर्चा में हैं। दरअसल बड़े अफसर से पिछली हाई लेवल बैठक में बार बार दिल्ली यात्राओं के रिजल्ट और स्टेट के फायदे को लेकर सवाल जवाब हुए थे। उसे लेकर वे ठोस जवाब नहीं दे पाए थे। इस बार की बैठक से तेजतर्रार अफसर नदारद थे। अब हाईलेवल बैठक से महकमे का मुखिया गायब रहे तो चर्चा होना स्वाभाविक है। अब उनकी गैर मौजूदगी को लेकर तरह तरह की बातें हो रही हैं। मामले में कुछ न कुछ नया राग शुरू होने की चर्चा है। पूर्व मुखिया ने युवा नेताओं के सामने कैसे खड़ी की मुश्किल? हाल ही राजधानी में विपक्षी पार्टी की युवा विंग ने राजधानी में बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार मेला लगाया। रोजगार मेला लगाने के पीछे पूर्व संगठन मुखिया के समर्थक युवा नेताओं ने पूरा जोर लगाया। पूर्व संगठन मुखिया तो मेले में नहीं आए लेकिन पूर्व प्रदेश मुखिया मेले में आ गए। युवा नेताओं के साामने धर्मसंकट खड़ा हो गया, करें तो क्या करें? पूर्व संगठन मुखिया और पूर्व प्रदेश मुखिया के बीच कैसे सियासी रिश्ते हैं, यह सब जानते हैं। पूर्व संगठन मुखिया के समर्थक युवा नेताओं ने धर्म संकट से बचने के लिए तोड़ निकाल ही लिया। सोशल मीडिया में फोटो डालने में पूर्व मुखिया को गायब कर दिया। अब खेमेबंदी की सियासत में हाथ भले मिल जाएं, दिल थोड़े ही मिलते हैं। इस घटना से यह बात सही साबित हो गई। सुनी-सुनाई में पिछले सप्ताह भी थे कई किस्से, पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें सत्ताधारी नेताजी को किसने गेट पर रोका?:अल्पसंख्यक युवा नेता को बड़ा पद देने की सिफारिश; आईएएस और आरएएस के बीच ठनी

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