पेपरलीक मामले में पिछले दो साल से जेल में बंद आरपीएससी के निलंबित सदस्य बाबूलाल कटारा की जमानत याचिका खारिज हो गई है। जयपुर की सीबीआई मामलों की विशेष अदालत ने इस मामले में बाकी आरोपियों की हाईकोर्ट से जमानत खारिज होने और कटारा के खिलाफ सबूतों का हवाला देते हुए जमानत देने से साफ इनकार कर दिया। कोर्ट ने आदेश में कहा कि इस पूरे मामले में सबूतों को देखते हुए आरोपी जमानत पाने का हकदार नहीं है। मामले में दूसरे आरोपियों की जमानत याचिका हाईकोर्ट खारिज कर चुका है। 24 फरवरी को हाईकोर्ट की एकल पीठ ने जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान यह साफ कहा था कि सार्वजनिक परीक्षाओं के पेपर लीक होने से समाज पर खराब प्रभाव पड़ता है। इसलिए सारे तथ्यों, परिस्थितियों को देखते हुए और आरोपी के अपराध को देखते हुए जमानत का लाभ दिया जाना उचित नहीं है। कटारा का तर्क- मुझे झूठा फंसाया
बाबूलाल कटारा की ओर से दायर जमानत याचिका में तर्क किया गया कि मामले में झूठा फंसाया गया है और मात्र कयास के आधार पर मुल्जिम बना दिया गया। सेकेंड ग्रेड शिक्षक भर्ती परीक्षा के लीक हुए पेपर से संबंधित कोई भी सबूत उससे बरामद नहीं हुआ है। जिस बस में पेपर सॉल्व हुआ, वहां मौजूद नहीं था, पेपरलीक से संबंधित कोई मामले में वह शामिल नहीं है। कटारा ने अपनी उम्र का हवाला देते हुए लिखा कि वह 65 साल का बुजुर्ग व्यक्ति है और 2 साल से जेल में है। इस मामले में अभी भी कई संदिग्ध व्यक्तियों के खिलाफ जांच लंबित है, ऐसे में इस मामले में समय लगने की संभावना है। इस तर्क पर जमानत आवेदन पेश किया गया था। सरकारी वकीलों की दलील, कटारा पेपरलीक का मुख्य भागीदार
कटारा की जमानत याचिका का विरोध करते हुए सरकारी पक्ष के वकीलों ने कड़ा विरोध जताया। सरकारी वकीलों का तर्क था कि बाबूलाल कटरा ग्रेड सेकेंड टीचर भर्ती पेपरलीक करने का मुख्य भागीदार रहा है और आरपीएससी का मेंबर रहते हुए उनकी भूमिका रही है। ग्रेड सेकेंड शिक्षक भर्ती परीक्षा के दौरान उसे पेपर बनाने का काम सौंपा गया था। कटारा ने ही पेपर तैयार करवाने के बाद उसे अपने घर लाकर एक रजिस्टर में अपने भांजे विजय डामोर से रजिस्टर में उतरवाया और फिर उस पेपर को फिर से आरपीएससी के दफ्तर में रखवा दिया था। जिस रजिस्टर में पेपर के सवाल लिखे गए, उस रजिस्टर का नकल गिरोह के सरगना अनिल कुमार मीणा ने फोटो खींचकर आगे भेजा। कटारा का अपराध बाकी आरोपियों से भी गंभीर
सरकारी वकीलों ने दलील दी कि इस मामले के आरोपी अनिल कुमार मीणा से कटारा संपर्क में था और उसकी निशानदेही पर ही अनिल मीणा से 51.20 लाख रुपए और 541 ग्राम सोना बरामद किया गया था। कटारा के भांजे से भी पांच तोला सोने का कड़ा और आईफोन बरामद किया गया था, जो पेपर लीक के बदले में मिला था। कटारा के खिलाफ और भी बहुत सारे सबूत हैं। इस मामले के सह आरोपियों की जमानत याचिकाएं हाईकोर्ट खारिज कर चुका है, जबकि कटारा अपराध तो उनसे भी ज्यादा गंभीर प्रकृति का है। सामान्य ज्ञान का पेपर लीक करवाया था
कटारा के खिलाफ पेपरलीक मामले में एसीबी और उदयपुर के सुखेर थाने में मामले दर्ज है। 2022 में उदयपुर जिले के बेकरिया थाना में ग्रेड सेकेंड टीचर भर्ती पेपरलीक का मामला दर्ज किया गया, उसके बाद पुखराज, लूणाराम, भूपेंद्र सारण के खिलाफ चार्जशीट पेश की गई। चार्जशीट में साफ उल्लेख है कि ग्रेड सेकेंड टीचर भर्ती परीक्षा 2022 के अभ्यर्थियों को बस में बैठाकर लीक पेपर हल करवाया गया। बस की तलाशी में छापा मारकर इन्हें लीक पेपर हल करते पकड़ा था। बस में सुरेश साहू इन सभी को पेपर सॉल्व करवा रहा था। पेपरलीक करने वालों की पूरी चैन थी
ग्रेड सेकेंड टीचर भर्ती परीक्षा 2022 के सामान्य ज्ञान का पेपर लीक किया गया था। इसमें सुरेश ढाका ने भूपेंद्र सारण से लीक पेपर लेकर आगे सुरेश साहू को उपलब्ध करवाया । सुरेश साहू ने पुखराज के पास भेजा गया और आरोपी पुखराज ने इसे प्रिंट करके पीराराम को दिया था। पीराराम ने अन्य अभ्यर्थियों को पेपर उपलब्ध कराने के लिए सुरेश को दिया गया था। कटारा के खिलाफ पेपरलीक मामले में चार्जशीट पेश हो चुकी है। कटारा को आरपीएससी का मेंबर रहते हुए पेपर तैयार करवाने का काम दिया था। कटारा उस पेपर को आरपीएससी से अपने घर लाया था। घर पर अपने भांजे विजय डामोर से एक रजिस्टर में सवाल लिखवाए थे। रजिस्टर से पेपर की फोटो अनिल कुमार मीणा के खींचे जाने में कटारा शामिल रहा है। आरोप पत्र के मुताबिक अनिल कटारा पहले से अनिल कुमार मीणा के लगातार संपर्क में था। …………………………….. पेपरलीक से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…
बाबूलाल कटारा ने सरकारी गवाह बनने की जताई मंशा:पेपरलीक में मांगी माफी; कोर्ट ने कहा- इसकी जरूरत नहीं, फाइल में पर्याप्त सबूत
पेपरलीक मामले में जेल में बंद राजस्थान लोक सेवा आयोग (आरपीएससी) के पूर्व सदस्य बाबूलाल कटारा के सरकारी गवाह बनने और क्षमादान चाहने की एप्लिकेशन को एडीजे कोर्ट ने खारिज कर दिया है। जयपुर महानगर द्वितीय की एडीजे-1 कोर्ट ने कहा- कटारा को सरकारी गवाह बनाए बिना भी फाइल में पर्याप्त सबूत है। पूरी खबर पढ़िए
