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📢 दोहरी वोटर लिस्ट विवाद पर प्रशांत किशोर का पलटवार — “अगर गलती मेरी है, तो गिरफ्तार करें”

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चुनाव आयोग (ECI) ने चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) को नोटिस जारी किया है। आयोग ने उनसे तीन दिनों में स्पष्टीकरण मांगा है कि उनका नाम बिहार और पश्चिम बंगाल, दोनों जगह की मतदाता सूची (Voter List) में क्यों शामिल है। इस पर किशोर ने तीखा पलटवार करते हुए कहा —

“अगर मेरा नाम दो मतदाता सूचियों में है, तो चुनाव आयोग बताए कि जब बिहार में SIR हुआ तो मेरा नाम डिलीट क्यों नहीं किया गया? अगर गलती मेरी है, तो मुझे गिरफ्तार करो।”


🧾 मामला क्या है?

मामला शुरू हुआ जब The Indian Express की एक रिपोर्ट में बताया गया कि प्रशांत किशोर का नाम दो अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूची में है —

  1. बिहार के करकट विधानसभा क्षेत्र (Karakat Assembly Constituency) में, और
  2. पश्चिम बंगाल के मणिकतला विधानसभा क्षेत्र (Ward No. 621, North Kolkata Parliamentary Constituency) में।

रिपोर्ट के आधार पर, चुनाव आयोग ने इस पर स्वतः संज्ञान लेते हुए किशोर को नोटिस भेजा।

नोटिस में लिखा गया —

“Representation of the People Act, 1950 की धारा 17 के अनुसार कोई भी व्यक्ति एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता के रूप में पंजीकृत नहीं हो सकता। इस प्रावधान का उल्लंघन धारा 31 के अंतर्गत दंडनीय अपराध है, जिसमें कारावास या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।”

आयोग ने किशोर से कहा कि वे तीन दिनों के भीतर जवाब प्रस्तुत करें


🗣️ प्रशांत किशोर का जवाब – “ECI खुद बताए गलती किसकी है”

नोटिस पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रशांत किशोर ने ECI पर ही सवाल उठा दिए। उन्होंने कहा —

“अगर मेरा नाम दो सूचियों में है, तो चुनाव आयोग को बताना चाहिए कि जब बिहार में SIR (Special Intensive Revision) हुआ, तब मेरा नाम क्यों नहीं हटाया गया? मैं 2019 से करकट में मतदाता हूं। दो साल मैं बंगाल में था, तब मैं वहां का वोटर था। अगर यह गलती मेरी है तो मुझे गिरफ्तार करें।”

उन्होंने यह भी कहा कि जब आयोग खुद हर राज्य में मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण कर रहा है, तो उसमें यह त्रुटि कैसे रह गई?


🏛️ बंगाल में TMC दफ्तर का पता क्यों जुड़ा?

The Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रशांत किशोर का पश्चिम बंगाल वाला पता 121 कालीघाट रोड, कोलकाता दर्ज है — यह वही पता है जहां तृणमूल कांग्रेस (TMC) का मुख्य कार्यालय स्थित है।

यह पता संभवतः उस समय का है जब किशोर 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी के लिए चुनावी रणनीतिकार के रूप में काम कर रहे थे।

यानी उनके बंगाल मतदाता के रूप में पंजीकरण की पृष्ठभूमि वहीं से जुड़ती है।


⚖️ चुनाव आयोग का रुख

ECI का कहना है कि यह मामला कानूनी उल्लंघन की श्रेणी में आता है।

“धारा 17 और 31 के तहत, दोहरी वोटर लिस्ट रखना दंडनीय अपराध है। मतदाता सूची की सटीकता सुनिश्चित करना आयोग की प्राथमिकता है।”

साथ ही आयोग ने यह भी कहा कि Special Intensive Revision (SIR) का एक उद्देश्य ही यही है कि डुप्लीकेट और फर्जी नाम हटाए जाएँ


🔍 SIR और इसका विवाद

SIR (Special Intensive Revision) हाल ही में पूरे देश में शुरू की गई एक प्रक्रिया है। इसका मकसद मतदाता सूचियों की सफाई और अपडेट करना है।

लेकिन विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR का इस्तेमाल चुनावों से पहले वोटरों को डिलीट करने के लिए किया जा रहा है, खासतौर पर गरीब और विपक्ष समर्थक इलाकों में।

विपक्ष के आरोप

  • कांग्रेस ने कहा कि यह भाजपा और चुनाव आयोग की मिलीभगत से किया जा रहा है ताकि NDA के लिए बड़ा जनादेश तैयार हो सके।
  • TMC और RJD जैसे दलों ने इसे “वोटर सफाई नहीं, वोटर डिलीशन एक्सरसाइज” बताया।

भाजपा और ECI का जवाब

भाजपा और चुनाव आयोग दोनों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा —

“SIR एक पारदर्शी प्रक्रिया है जिसका उद्देश्य केवल मतदाता सूची की शुद्धता बढ़ाना है, किसी को वोटर सूची से हटाना नहीं।”


📉 राजनीतिक पृष्ठभूमि

प्रशांत किशोर ने बतौर चुनावी रणनीतिकार देशभर में कई दलों के लिए काम किया है —

  • 2014 में नरेंद्र मोदी के लिए BJP कैंपेन,
  • 2015 में नीतीश कुमार के लिए JDU,
  • 2017 में कांग्रेस-राहुल गांधी टीम,
  • 2021 में TMC और ममता बनर्जी के लिए,
  • और बाद में ‘जन सुराज’ आंदोलन के साथ बिहार की राजनीति में प्रवेश किया।

इस समय वे बिहार में जन सुराज अभियान के जरिए जनता से सीधा संवाद कर रहे हैं और 2026 के विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रहे हैं।


🗯️ प्रशांत किशोर का सियासी वार

चुनाव आयोग के नोटिस के बाद किशोर ने मीडिया से बातचीत में कहा —

“बिहार में SIR हुआ, लेकिन इससे क्या फर्क पड़ा? क्या किसी का नाम हटा? कुछ लोगों को थोड़ी परेशानी जरूर हुई। भाजपा चाहे जितनी कोशिश कर ले — किसी का नाम हटाना हो, डराना हो या परेशान करना — अगर जनता आपके खिलाफ हो गई, तो कोई SIR या FIR आपको नहीं बचा पाएगा।”

उनके इस बयान से साफ है कि वे इसे राजनीतिक साजिश के रूप में देख रहे हैं।


🧠 राजनीतिक विश्लेषण — नोटिस के पीछे की राजनीति

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल “डुप्लीकेट वोटर एंट्री” तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे सियासी संदेश भी छिपा है।

🔹 ECI के लिए साख का सवाल

चुनाव आयोग ने हाल ही में जब पूरे देश में SIR शुरू किया, तब से उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में प्रशांत किशोर जैसे प्रसिद्ध राजनीतिक व्यक्ति पर कार्रवाई करना आयोग के लिए “निष्पक्षता का प्रदर्शन” भी माना जा सकता है।

🔹 किशोर के लिए पब्लिक सिम्पैथी

दूसरी ओर, किशोर ने “अगर गलती मेरी है तो गिरफ्तार करो” जैसी चुनौती देकर खुद को एक साहसिक और जनता के पक्ष में खड़े नेता के रूप में पेश किया है। यह उनके “जन सुराज” आंदोलन के लिए राजनीतिक पूंजी (Political Capital) भी बन सकती है।


📜 कानूनी दृष्टि से क्या हो सकता है आगे?

कानूनी रूप से, यदि दोहरी वोटर लिस्ट की पुष्टि होती है, तो:

  1. धारा 31 (Representation of the People Act, 1950) के तहत प्रशांत किशोर पर जुर्माना या 1 वर्ष तक की सजा हो सकती है।
  2. ECI पहले नाम हटाने की प्रक्रिया शुरू करेगा, फिर आवश्यकता पड़ने पर कार्रवाई करेगा।
  3. यदि किशोर यह साबित कर देते हैं कि यह प्रशासनिक त्रुटि (clerical error) थी, तो मामला बंद भी हो सकता है।

🔎 क्या यह सिर्फ तकनीकी गलती है?

कई बार मतदाता सूची अपडेट न होने के कारण डुप्लीकेट एंट्री रह जाती है। जब कोई व्यक्ति नया वोटर ID किसी अन्य राज्य में बनवाता है, तो पुराना ID मैन्युअली डिलीट करना पड़ता है। अगर यह समय पर न हो, तो दोहरी प्रविष्टि रह जाती है।

संभावना यही है कि प्रशांत किशोर के मामले में भी यही हुआ हो —
वे जब बंगाल में TMC के साथ काम कर रहे थे, तब उन्होंने वहां वोटर ID बनवाया, और बाद में बिहार लौटने पर दोबारा पंजीकरण कराया।


📅 घटनाक्रम की टाइमलाइन

तारीखघटना
2019प्रशांत किशोर ने बिहार के करकट विधानसभा में वोटर रजिस्ट्रेशन कराया
2021बंगाल चुनावों के दौरान TMC के कैंपेन एडवाइजर बने, कोलकाता में वोटर के रूप में नाम जोड़ा गया
अक्टूबर 2025The Indian Express रिपोर्ट में दोहरी वोटर एंट्री का खुलासा
27 अक्टूबर 2025चुनाव आयोग ने SIR के तहत पूरे भारत में मतदाता सूची पुनरीक्षण की घोषणा की
28 अक्टूबर 2025ECI ने प्रशांत किशोर को तीन दिन में जवाब देने का नोटिस जारी किया
28 अक्टूबर 2025प्रशांत किशोर ने मीडिया से कहा — “अगर गलती मेरी है, तो गिरफ्तार करो”

📢 जन सुराज का बयान

“यह सारा प्रकरण सत्ता की घबराहट का नतीजा है,” जन सुराज के प्रवक्ता ने कहा।

“प्रशांत किशोर जनता के मुद्दों को उठा रहे हैं, इसलिए उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। दोहरी वोटर लिस्ट जैसी गलती सिस्टम की है, व्यक्ति की नहीं।”


🧩 निष्कर्ष

यह विवाद केवल एक तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि राजनीतिक टकराव का नया अध्याय बन गया है।

  • एक ओर चुनाव आयोग अपनी साख बचाने और मतदाता सूची को शुद्ध बनाने की कोशिश में है,
  • दूसरी ओर प्रशांत किशोर इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताकर जनता की सहानुभूति जुटा रहे हैं।

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ECI उनका जवाब स्वीकार करता है या कानूनी कार्रवाई की ओर बढ़ता है।

जो भी हो, प्रशांत किशोर का बयान —

“अगर गलती मेरी है तो गिरफ्तार करो”
— पहले ही सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में एक बड़ा नैरेटिव बन चुका है।


News Published by Raj Daily News (https://rajdailynews.in)