Chhath Puja 2025 Surya Arghya: छठ पूजा में कैसे दें डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य, जानें सही नियम, समय और पूजा विधिChhath Puja 2025 Surya Arghya: छठ पूजा में कैसे दें डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य, जानें सही नियम, समय और पूजा विधि

छठ पूजा 2025: डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देने की विधि, समय, नियम और महत्व

छठ पूजा, जिसे सूर्य उपासना का सबसे पवित्र पर्व कहा जाता है, इस बार भी पूरे भारत में बड़े श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जा रही है। आज यानी 27 अक्टूबर को डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा, जबकि कल 28 अक्टूबर को उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर यह पर्व संपन्न होगा।

छठ पूजा में भगवान सूर्य को जल अर्पित कर उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट की जाती है। यह पर्व न केवल सूर्य देव की आराधना का प्रतीक है, बल्कि इसमें शुद्धता, संयम और भक्तिभाव का विशेष महत्व होता है।

Chhath Puja 2025 Surya Arghya: छठ पूजा में कैसे दें डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य, जानें सही नियम, समय और पूजा विधि
Chhath Puja 2025 Surya Arghya: छठ पूजा में कैसे दें डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य, जानें सही नियम, समय और पूजा विधि

छठ पूजा का महत्व

हिंदू परंपरा में छठ माता, जिन्हें भगवान सूर्य की बहन माना गया है, की पूजा विशेष रूप से की जाती है। ऐसा माना जाता है कि उनकी पूजा से संतान की रक्षा, परिवार की सुख-समृद्धि और दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

कहा जाता है कि छठ पूजा करने से घर में शांति आती है, संतान दीर्घायु होती है और परिवार में धन-धान्य की वृद्धि होती है।
छठ माता और सूर्य देव की कृपा से हर मनोकामना पूरी होती है।


व्रत और नियम – शुद्धता ही सबसे बड़ा तप

छठ पूजा को निजला व्रत कहा जाता है क्योंकि इसमें व्रती 36 घंटे तक निर्जला (बिना पानी) उपवास रखता है।
इस व्रत में शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है —

  • घर में पवित्रता बनाए रखी जाती है।
  • व्रती केवल शुद्ध भोजन करता है।
  • पूजा सामग्री और अर्घ्य का जल विशेष रूप से साफ पात्रों में रखा जाता है।

इस कारण यह व्रत हिंदू धर्म के सबसे कठिन और पवित्र व्रतों में से एक माना जाता है।


सूर्य को अर्घ्य क्यों दिया जाता है?

हिंदू मान्यता के अनुसार, सूर्य देव जीवनदाता हैं — वे ही पृथ्वी पर जीवन और ऊर्जा का स्रोत हैं।
छठ पूजा के दौरान सूर्य को जल अर्पित करना उनके प्रति आभार प्रकट करने और जीवन में प्रकाश, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करने का प्रतीक है।

डूबते सूर्य को अर्घ्य देने से दुख और रोग दूर होते हैं, जबकि उगते सूर्य को अर्घ्य देने से नए जीवन, सुख और ऊर्जा का आशीर्वाद मिलता है।


अर्घ्य देने की विधि

जब व्रती भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के लिए जल में खड़ा होता है, तो यह क्रिया अत्यंत शुद्ध और अनुशासित तरीके से की जाती है।

  1. संध्या अर्घ्य (डूबते सूर्य को अर्घ्य देने की विधि):
    • सूर्यास्त से कुछ समय पहले नदी, तालाब या घर में बनाए गए घाट पर जल में खड़े हों।
    • जल के पात्र में लाल चंदन, सिंदूर, लाल फूल, गन्ना और गुड़ मिलाएँ।
    • भगवान सूर्य की ओर मुख करें और धीरे-धीरे जल अर्पित करें।
    • ध्यान रखें कि जल सूर्य की किरणों को स्पर्श करे।
    • अर्घ्य देते समय मंत्र बोलें: “ॐ सूर्याय नमः।”
  2. प्रदक्षिणा और ध्यान:
    अर्घ्य देने के बाद सूर्य की तीन बार परिक्रमा करें।
    भगवान सूर्य को मन ही मन धन्यवाद दें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।
  3. उदयकालीन अर्घ्य (उगते सूर्य को अर्घ्य देने की विधि):
    • अगली सुबह यानी 28 अक्टूबर को सूर्योदय से पहले घाट पर पहुँचे।
    • जब सूर्य की पहली किरण निकले, तो उन्हें जल अर्पित करें।
    • इस दौरान व्रती अपने साथ सूप में मौसमी फल, गन्ना, ठेकुआ, और गुड़ की खीर रखता है।
    • सूर्य देव को जल देने के बाद इन्हीं प्रसादों से पूजा की जाती है और व्रत समाप्त होता है।

सूर्य अर्घ्य के नियम

छठ पूजा में सूर्य को अर्घ्य देते समय कुछ नियमों का पालन अनिवार्य माना गया है:

  • सूर्य को अर्घ्य हमेशा लाल वस्त्र पहनकर दें।
  • सिंदूर, चंदन, लाल फूल और दूध मिलाकर जल चढ़ाना शुभ होता है।
  • अर्घ्य देते समय मन पूरी तरह एकाग्र रखें और कोई बातचीत न करें।
  • सूर्य को जल अर्पित करते समय पैरों से पानी नहीं गिरना चाहिए। जल को हाथों से आगे की ओर बढ़ाते हुए सूर्य की दिशा में प्रवाहित करें।
  • महिलाएँ सामान्यतः लाल या पीले रंग की साड़ी पहनकर अर्घ्य देती हैं, जो शुभता का प्रतीक है।

अर्घ्य देने का सही समय

छठ पूजा 2025 के अर्घ्य समय:

दिल्ली:

  • सूर्यास्त – शाम 5 बजकर 40 मिनट तक

पटना:

  • सूर्यास्त – शाम 5 बजकर 11 मिनट तक

लखनऊ:

  • सूर्यास्त – शाम 5 बजकर 27 मिनट तक

रांची:

  • सूर्यास्त – शाम 5 बजकर 13 मिनट तक

28 अक्टूबर 2025 (उगते सूर्य का समय)

  • पटना: सूर्योदय – सुबह 5:55 AM
  • भागलपुर: सूर्योदय – सुबह 5:55 AM
  • लखनऊ: सूर्योदय – सुबह 5:46 AM
  • दिल्ली: सूर्योदय – सुबह 5:59 AM

अर्घ्य देने का सर्वोत्तम समय: सूर्योदय से लगभग 30 मिनट पहले से लेकर सूर्योदय के 15 मिनट बाद तक का समय श्रेष्ठ माना जाता है।


सूर्य अर्घ्य के समय ये विशेष बातें रखें ध्यान

  • सूर्य को जल चढ़ाते समय अगर जल में गुड़, दूध और लाल फूल डालें, तो इससे आर्थिक समृद्धि प्राप्त होती है।
  • सूर्य की पहली किरण जब जल पर पड़े, तो व्रती को प्रकाश और ऊर्जा का संचार महसूस होता है।
  • अर्घ्य देते समय श्रद्धा और एकाग्रता बनाए रखें।
  • मन में यही भावना रखें — “सूर्य देव, आपके प्रकाश से ही जीवन संभव है, हमें सदैव ऊर्जा, स्वास्थ्य और सुख प्रदान करें।”

क्या न करें

  • अर्घ्य देते समय पीछे मुड़कर न देखें।
  • सूर्य अर्घ्य का जल कभी अपवित्र पात्र में न रखें।
  • पूजा के दौरान किसी से झगड़ा या अशुभ विचार न रखें।

व्रत की पूर्ति और प्रसाद

उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रती अपना व्रत पूर्ण करता है। इस समय घर में बने प्रसाद को परिवार और समाज में बाँटा जाता है।
ठेकुआ, चावल की खीर, गन्ना और मौसमी फल इस प्रसाद का मुख्य हिस्सा होते हैं।

इस दिन व्रती अपने प्रियजनों के साथ प्रसाद ग्रहण करता है, जिसे पारण कहा जाता है।


छठ पूजा की पौराणिक कथा

कहा जाता है कि महाभारत काल में कुंती पुत्र कर्ण सूर्य देव के अनन्य उपासक थे। उन्होंने प्रतिदिन जल अर्पण कर सूर्य से शक्ति प्राप्त की थी।
इसी तरह से सूर्य की उपासना का यह पर्व बाद में छठ व्रत के रूप में विकसित हुआ।

एक अन्य कथा के अनुसार, जब राजा प्रियव्रत और रानी मालिनी संतान प्राप्ति के लिए व्याकुल थे, तब भगवान सूर्य की कृपा से उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई।
इसलिए छठ पूजा को संतान सुख का पर्व भी कहा जाता है।


छठ पूजा 2025 का विशेष योग

इस बार छठ पूजा कार्तिक शुक्ल षष्ठी तिथि को पड़ रही है, जो विशेष रूप से शुभ मानी गई है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, सूर्य और चंद्रमा की शुभ स्थिति इस बार व्रत करने वालों के लिए आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा लेकर आएगी।


श्रद्धा, संयम और भक्ति का पर्व

छठ पूजा न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह आत्मसंयम, परिवार के प्रति समर्पण और प्रकृति के प्रति आभार की अभिव्यक्ति भी है।
इस दिन घाटों पर व्रती महिलाएँ और पुरुष अपने परिवार की खुशहाली के लिए सूर्य देव से प्रार्थना करते हैं।

सूर्य की पहली किरण जब पानी पर पड़ती है, तो व्रती के चेहरे पर जो शांति और सुकून झलकता है, वही छठ पूजा की असली पहचान है।


निष्कर्ष

छठ पूजा भारतीय संस्कृति की वह धारा है जहाँ प्रकृति, श्रद्धा और आत्मबल का संगम होता है।
सूर्य अर्घ्य केवल जल अर्पण नहीं, बल्कि यह जीवन के प्रकाश और नई शुरुआत का प्रतीक है।

आज डूबते सूर्य को अर्घ्य देते समय हर व्रती अपने दुख, पीड़ा और संघर्षों को जल में बहा देता है, और कल उगते सूर्य को अर्घ्य देकर नई ऊर्जा और उम्मीद के साथ जीवन की नई सुबह का स्वागत करता है।


स्रोत: Raj Daily News – https://rajdailynews.in