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मार्क्स एंड स्पेंसर ने TCS के साथ IT सर्विस डेस्क कॉन्ट्रैक्ट समाप्त किया, कंपनी ने कहा — “साइबर अटैक से कोई संबंध नहीं”
ब्रिटेन की रिटेल कंपनी Marks & Spencer (M&S) ने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के साथ चल रहे अपने IT सर्विस डेस्क अनुबंध को समाप्त कर दिया है। यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब कुछ महीने पहले M&S पर एक बड़े साइबर अटैक का असर पड़ा था।
हालांकि, TCS ने इस संबंध में किसी भी तरह की जिम्मेदारी से खुद को मुक्त बताया है और कहा है कि अनुबंध समाप्ति का कारण साइबर अटैक नहीं, बल्कि नियमित व्यावसायिक प्रक्रिया (Regular Competitive Procurement Process) है।

क्या है पूरा मामला?
M&S ने बताया कि उसने TCS के साथ चल रहे IT सर्विस डेस्क अनुबंध को जुलाई 2025 में समाप्त किया, जबकि अनुबंध नवीनीकरण की प्रक्रिया जनवरी में शुरू की गई थी।
M&S के अनुसार, कंपनी ने एक नए सर्विस प्रोवाइडर को नियुक्त किया है, लेकिन TCS के साथ अन्य टेक्नोलॉजी और IT प्रोजेक्ट्स जारी रहेंगे।
M&S के प्रवक्ता ने कहा —
“हमने IT सर्विस डेस्क अनुबंध के लिए बाज़ार में उपलब्ध विकल्पों का मूल्यांकन किया, और thorough process के बाद एक नए प्रदाता को चुना। यह बदलाव सामान्य प्रक्रिया के तहत किया गया है और TCS के साथ हमारी अन्य साझेदारी पर इसका कोई असर नहीं है।”
साइबर अटैक का प्रभाव — M&S को 300 मिलियन पाउंड का नुकसान
अप्रैल 2025 में हुए साइबर हमले के कारण M&S को अपने ऑनलाइन ऑर्डर्स अस्थायी रूप से बंद करने पड़े थे, जिससे बिक्री पर गहरा असर पड़ा।
कंपनी ने अनुमान लगाया है कि इस घटना से उसे करीब 300 मिलियन पाउंड (लगभग ₹3,100 करोड़) का नुकसान हो सकता है।
M&S के चेयरमैन आर्ची नॉर्मन ने ब्रिटिश संसद में बताया था कि यह हमला एक “सघन साइबर इम्परसनेशन अटैक (Sophisticated Impersonation Attack)” था, जिसमें “थर्ड पार्टी एक्सेस पॉइंट” के जरिए सिस्टम में प्रवेश किया गया था।
हालांकि, TCS ने आंतरिक जांच के बाद स्पष्ट किया कि उनके नेटवर्क में “किसी भी तरह की सुरक्षा कमी या समझौता (Compromise)” नहीं पाया गया।
TCS का बयान — “अनुबंध समाप्ति और साइबर अटैक पूरी तरह असंबंधित”
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज ने रविवार को जारी एक बयान में कहा कि The Telegraph द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट “भ्रामक और तथ्यों से परे” है।
“यह दावा कि M&S ने $1 बिलियन के अनुबंध को साइबर अटैक की वजह से रद्द किया, पूरी तरह गलत है। अनुबंध का नवीनीकरण जनवरी 2025 में शुरू हुआ था, और M&S ने अप्रैल 2025 में हुए साइबर अटैक से पहले ही किसी अन्य पार्टनर को चुन लिया था,” TCS ने कहा।
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि IT सर्विस डेस्क कॉन्ट्रैक्ट उनके कुल M&S एंगेजमेंट का बहुत छोटा हिस्सा है और इस अनुबंध की समाप्ति से $1 बिलियन जैसे किसी बड़े डील पर कोई असर नहीं पड़ा।
बयान में आगे कहा गया:
“The Telegraph की रिपोर्ट में न केवल अनुबंध के मूल्य का गलत उल्लेख किया गया, बल्कि यह तथ्य भी नजरअंदाज किया गया कि TCS का M&S के साथ अन्य कई तकनीकी प्रोजेक्ट्स में काम जारी है।”
M&S और TCS का रिश्ता — एक दशक से अधिक पुराना
TCS और Marks & Spencer के बीच सहयोग 10 से अधिक वर्षों पुराना है।
मुंबई स्थित यह कंपनी Tata Sons समूह का सबसे बड़ा अंग है और यूके सहित दुनिया भर के वित्त, ऊर्जा, रिटेल, जल और न्यूक्लियर सेक्टर में सेवाएँ प्रदान करती है।
M&S ने यह भी कहा कि TCS अब भी कंपनी के अन्य टेक्नोलॉजी और IT प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है।
“हम TCS के साथ अपनी साझेदारी को महत्व देते हैं,” M&S ने बयान में कहा।
साइबर अटैक की जांच और संसद में चर्चा
अप्रैल के हमले के बाद ब्रिटिश हाउस ऑफ कॉमन्स की बिजनेस एंड ट्रेड सिलेक्ट कमेटी ने TCS से इस मामले पर स्पष्टीकरण मांगा था।
लियम बर्न, समिति के अध्यक्ष ने TCS से यह भी पूछा कि क्या अन्य ग्राहकों — जैसे Jaguar Land Rover — के सिस्टम में भी कोई समान खतरा पाया गया है।
इसके जवाब में TCS ने कहा —
“हमारे नेटवर्क में किसी भी ग्राहक (M&S, JLR या अन्य) से जुड़े किसी भी सुरक्षा उल्लंघन का कोई संकेत नहीं मिला है।”
TCS ने “$1 बिलियन” अनुबंध की रिपोर्ट को बताया मनगढ़ंत
The Telegraph ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि यह अनुबंध “$1 बिलियन मूल्य का” था और M&S ने इसे समाप्त कर दिया।
लेकिन TCS ने इस दावे को “अतिशयोक्तिपूर्ण और झूठा” बताते हुए कहा कि अनुबंध का यह मूल्य वास्तविकता से बहुत छोटा था।
“रिपोर्ट में बताया गया $1 बिलियन आंकड़ा गलत और भ्रामक है। M&S का यह अनुबंध हमारे कुल व्यावसायिक समझौतों में बहुत छोटा हिस्सा था।,” TCS ने कहा।
बाद में The Telegraph ने अपनी रिपोर्ट से यह आंकड़ा हटा दिया।
अनुबंध समाप्ति का असली कारण
TCS के अनुसार, जनवरी 2025 में M&S ने Request for Proposal (RFP) प्रक्रिया शुरू की थी — यानी यह अनुबंध पहले से ही प्रतिस्पर्धात्मक बोली प्रक्रिया के अधीन था।
इस प्रक्रिया के दौरान M&S ने बाजार में उपलब्ध कई अन्य सेवा प्रदाताओं की तुलना की और फिर नए प्रदाता को नियुक्त करने का निर्णय लिया।
इस बदलाव को TCS और M&S दोनों ने “नियमित व्यावसायिक निर्णय” बताया, जिसका साइबर घटना से कोई संबंध नहीं है।
कंपनी की वित्तीय स्थिति पर असर
साइबर अटैक के कारण M&S के परिचालन लाभ (Operating Profit) में इस वित्तीय वर्ष में 300 मिलियन पाउंड तक की कमी आने का अनुमान है।
हालांकि कंपनी का कहना है कि इसका दीर्घकालिक असर सीमित रहेगा, क्योंकि सभी सिस्टम अब सुरक्षित और बहाल हो चुके हैं।
TCS के लिए यह अनुबंध आर्थिक दृष्टि से बहुत बड़ा नहीं था, लेकिन मीडिया रिपोर्टों के चलते कंपनी को प्रतिष्ठा संबंधी नुकसान (Reputational Impact) झेलना पड़ा।
साइबर सुरक्षा पर बढ़ता फोकस
इस घटना के बाद ब्रिटेन में रिटेल और फाइनेंस सेक्टर की कई कंपनियाँ अपने IT सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने में जुटी हैं।
TCS जैसी कंपनियाँ भी अब AI आधारित साइबर डिफेंस, डेटा एन्क्रिप्शन और नेटवर्क हाइजीन प्रोटोकॉल को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रही हैं।
भारत में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला वैश्विक कंपनियों के लिए “सप्लाई चेन सिक्योरिटी” का एक सबक है — यानी थर्ड पार्टी वेंडर्स की सुरक्षा अब उतनी ही अहम है जितनी प्राथमिक कंपनी की।
M&S का भविष्य का डिजिटल रोडमैप
Marks & Spencer ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी ई-कॉमर्स और सप्लाई चेन टेक्नोलॉजी में बड़ा निवेश किया है।
कंपनी अब अपने नए IT सर्विस पार्टनर के साथ क्लाउड आधारित सर्विस प्लेटफॉर्म और साइबर रेजिलिएंस स्ट्रैटेजी पर काम कर रही है।
इस कदम का मकसद है कि भविष्य में किसी भी तरह की डिजिटल बाधा या साइबर अटैक का सामना करने के लिए M&S के पास सशक्त सुरक्षा प्रणाली हो।
विशेषज्ञों की राय
लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर जेम्स रिचर्डसन का कहना है —
“यह घटना दिखाती है कि बड़ी कंपनियों को अब अपने डेटा सुरक्षा ढांचे की पुनर्समीक्षा करनी होगी। कॉन्ट्रैक्ट बदलना सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन जब यह साइबर घटनाओं के बाद होता है, तो प्रश्न उठते हैं — भले ही कंपनियाँ इसे असंबंधित बताएं।”
वहीं भारतीय IT उद्योग विश्लेषक संदीप बंसल का कहना है कि —
“TCS ने स्थिति को बहुत परिपक्वता से संभाला। उन्होंने तुरंत जांच की, संसद को जानकारी दी और सार्वजनिक रूप से जवाब दिया। इससे उनका भरोसा कायम रहेगा।”
TCS का वैश्विक पोर्टफोलियो
TCS इस समय 211 यूके आधारित ग्राहकों को सेवाएँ दे रही है। इनमें वित्तीय, ऊर्जा, जल, और न्यूक्लियर सेक्टर की बड़ी कंपनियाँ शामिल हैं।
कंपनी का कहना है कि वह अपने वैश्विक ग्राहकों के लिए “Zero-Trust Security Framework” लागू कर रही है ताकि भविष्य में किसी तरह की साइबर घटना से बचा जा सके।
निष्कर्ष
Marks & Spencer और Tata Consultancy Services के बीच यह घटना दिखाती है कि कॉर्पोरेट साझेदारियाँ कितनी संवेदनशील होती हैं — खासकर तब, जब तकनीकी और सुरक्षा से जुड़ी हों।
भले ही मीडिया रिपोर्टों ने इसे साइबर अटैक से जोड़ा, लेकिन TCS और M&S दोनों ने स्पष्ट किया कि अनुबंध समाप्ति नियमित व्यावसायिक प्रक्रिया का हिस्सा थी।
TCS ने न केवल अपनी छवि को सुरक्षित रखा, बल्कि यह भी दिखाया कि वैश्विक IT कंपनियों के लिए पारदर्शिता और तत्परता अब सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
M&S ने भी अपने नए डिजिटल भागीदार के साथ आगे बढ़ने का निर्णय लेकर यह संकेत दिया है कि कंपनियाँ अब साइबर जोखिमों के बीच टेक्नोलॉजी ट्रांसफॉर्मेशन को और अधिक सतर्कता के साथ अपनाना चाहती हैं।
स्रोत: Raj Daily News – https://rajdailynews.in