Sophie Devine Retirement क्रिकेट की सच्ची सर्वगुण संपन्न खिलाड़ी ने कहा अलविदा, न्यूज़ीलैंड टीम और फैंस हुSophie Devine Retirement क्रिकेट की सच्ची सर्वगुण संपन्न खिलाड़ी ने कहा अलविदा, न्यूज़ीलैंड टीम और फैंस हु

सोफी डिवाइन ने कहा ODI क्रिकेट को अलविदा — एक युग का अंत और एक प्रेरक कहानी की शुरुआत

जब न्यूज़ीलैंड की महिला टीम इंग्लैंड के खिलाफ मैदान पर राष्ट्रीय गान के लिए खड़ी थी, सोफी डिवाइन की आंखों में आँसू थे। होंठ भींचे हुए थे, लेकिन भावनाएं छिपी नहीं। यह वही पल था जब क्रिकेट की सबसे समर्पित और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों में से एक ने अपने ODI करियर को विदाई दी

न्यूज़ीलैंड टीम वर्ल्ड कप से बाहर हो गई थी, और इंग्लैंड के खिलाफ अंतिम मैच में जीत तो दूर, मुकाबला भी नहीं दे सकी। लेकिन इससे सोफी डिवाइन के 19 साल लंबे क्रिकेट सफर की चमक जरा भी कम नहीं होती।

Sophie Devine Retirement क्रिकेट की सच्ची सर्वगुण संपन्न खिलाड़ी ने कहा अलविदा, न्यूज़ीलैंड टीम और फैंस हु
Sophie Devine Retirement क्रिकेट की सच्ची सर्वगुण संपन्न खिलाड़ी ने कहा अलविदा, न्यूज़ीलैंड टीम

“हर खिलाड़ी चाहता है कि वह ऊँचे नोट पर विदाई ले, पर ऐसा कम ही होता है,” डिवाइन ने कहा। “मैं अपने करियर पर बेहद गर्व महसूस करती हूँ। एक दिन या एक मैच यह तय नहीं कर सकता कि हमने क्या हासिल किया है।”


आँकड़ों से परे — डिवाइन का सफर

सोफी डिवाइन सिर्फ एक ऑलराउंडर नहीं, बल्कि एक पूरा अध्याय हैं न्यूज़ीलैंड क्रिकेट की किताब में।

  • ODI करियर: 159 मैच
  • रन: 4,000+
  • विकेट: 100+
  • यह आंकड़े उन्हें दुनिया की केवल तीन ऐसी खिलाड़ियों में शामिल करते हैं — ऑस्ट्रेलिया की एलिस पेरी और वेस्टइंडीज की स्टेफनी टेलर के साथ — जिन्होंने वनडे में 4,000 रन और 100 विकेट दोनों हासिल किए।

डिवाइन ने अपने करियर की शुरुआत 2006 में की थी और लगभग दो दशक बाद 2025 में मैदान छोड़ा। उन्होंने इस दौरान न सिर्फ रन और विकेट लिए, बल्कि न्यूज़ीलैंड टीम की संस्कृति, मानसिकता और मूल्यों को भी आकार दिया।


एक साधारण सी शुरुआत से बनीं सुपरस्टार

सोफी डिवाइन ने अपने क्रिकेट सफर की शुरुआत एक छोटे से शहर से की थी। बचपन में वो हॉकी भी खेलती थीं और 2011-12 में उन्होंने न्यूज़ीलैंड हॉकी टीम का भी प्रतिनिधित्व किया था। दो वर्षों के ब्रेक के बाद जब वे क्रिकेट में लौटीं, तो उनका अंदाज़ और भी निखरा हुआ था।

उनकी तेज़ बल्लेबाज़ी, आत्मविश्वास और मैदान पर शांति ने उन्हें जल्द ही न्यूज़ीलैंड की पहचान बना दिया।


क्रिकेट और जिंदगी के बीच संतुलन

डिवाइन ने कभी यह नहीं छिपाया कि उन्हें मेन्टल हेल्थ (मानसिक स्वास्थ्य) से संघर्ष करना पड़ा। उन्होंने कई बार क्रिकेट से ब्रेक लिया ताकि खुद को मानसिक रूप से मजबूत रख सकें।

इसके अलावा वे Type 1 Diabetes से भी जूझती रहीं, जो उन्हें हर मैच में ध्यानपूर्वक इंसुलिन प्रबंधन करने पर मजबूर करता था। इसके बावजूद उन्होंने कभी इसे कमजोरी नहीं बनने दिया।

“क्रिकेट ने मुझे बहुत कुछ दिया, लेकिन मैंने भी क्रिकेट को सब कुछ दिया,” उन्होंने कहा। “मैं चाहती हूँ कि खिलाड़ी यह समझें कि मानसिक स्वास्थ्य उतना ही ज़रूरी है जितना खेल।”


आखिरी मैच — भावनाओं का सागर

26 अक्टूबर 2025 को इंग्लैंड के खिलाफ डिवाइन का अंतिम वनडे मैच था। न्यूज़ीलैंड की टीम 39 ओवर में सिर्फ 168 रन बनाकर आउट हो गई। जवाब में इंग्लैंड ने आसानी से आठ विकेट से जीत दर्ज की।

डिवाइन ने मैच में हेदर नाइट को LBW आउट कर अपना आखिरी विकेट लिया। यह दृश्य खास था क्योंकि यह उनके करियर के आखिरी ओवरों में से एक था।

उन्होंने हँसते हुए कहा,

“हीदर ने तो बस चल दीं, लेकिन एमी जोन्स कम से कम एक बॉल तो डिफेंड कर सकती थीं! पर खैर, यह तो क्रिकेट है। आख़िर में मुझे ही चार खाकर जाना पड़ा — यही हकीकत है।”

और फिर उन्होंने कहा वो पंक्ति जो अब अमर हो चुकी है —

“Cricket doesn’t owe you anything (क्रिकेट आपको कुछ नहीं देता)।”

पर सच्चाई यह है कि क्रिकेट सोफी डिवाइन का बहुत कुछ ऋणी है।


साथी खिलाड़ियों की आँखें भी नम

मैच खत्म होने के बाद इंग्लैंड और न्यूज़ीलैंड, दोनों टीमों की खिलाड़ियों ने मैदान पर एक गार्ड ऑफ ऑनर बनाकर उन्हें विदाई दी।
डिवाइन के लिए यह भावनात्मक क्षण था।

“मैं चाहती थी कि सब सामान्य दिन की तरह रहे, लेकिन ऐसा होना संभव नहीं था,” उन्होंने कहा। “यह दिन खास था — मेरे लिए, मेरे परिवार के लिए, और मेरे देश के लिए।”


300वां अंतरराष्ट्रीय मैच और ‘पौनामु’ का उपहार

Aotearoa (न्यूज़ीलैंड) की पहचान वाले हरे पत्थर पौनामु (Pounamu) से बनी एक नेकलेस उनके टीममेट्स ने उन्हें उपहार में दी थी, जो उन्होंने अपने 300वें अंतरराष्ट्रीय मैच के दौरान पहनी।

यह नेकलेस उन्होंने 2025 वर्ल्ड कप के दौरान टॉस और राष्ट्रगान के वक्त पहनी थी — ताकि “थोड़ा न्यूज़ीलैंड दुनिया तक पहुँच सके।”


न्यूज़ीलैंड टीम का भविष्य — अब कौन लेगा जिम्मेदारी?

डिवाइन के जाने के बाद सवाल यह उठता है कि न्यूज़ीलैंड महिला टीम की कमान अब किसके हाथ में होगी।
38 वर्षीय सूज़ी बेट्स, जो उनसे दो साल बड़ी हैं, ने अभी तक अपने भविष्य को लेकर कोई घोषणा नहीं की है।

इस स्थिति में सबसे उपयुक्त नाम सामने आता है एमेलिया केर का।
25 साल की केर ने अब तक 172 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं और वे टीम की नई पीढ़ी की अगुआ हैं।

“मुझे लगता है नेतृत्व के लिए किसी पद की नहीं, भावना की ज़रूरत होती है,” केर ने कहा। “मैं बस अपने साथियों को प्रोत्साहित करना चाहती हूँ कि वे अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन में विश्वास रखें।”


कोच बेन सॉयर का बयान

न्यूज़ीलैंड टीम के मुख्य कोच बेन सॉयर ने कहा कि डिवाइन के साथ काम करना “सम्मान की बात” रही है।

“सोफी ने इस टीम की संस्कृति को आकार दिया। उन्होंने मैदान के भीतर और बाहर जो मूल्यों की नींव रखी, वही आज इस टीम की ताकत है। अब यह जिम्मेदारी युवा खिलाड़ियों की है कि वे इसे आगे बढ़ाएँ।”


आँकड़ों में डिवाइन की विरासत

  • ODI मैच: 159
  • रन: 4,012
  • औसत: 38.6
  • स्ट्राइक रेट: 85.25
  • विकेट: 108
  • T20I मैच: 146
  • कुल अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन: 300+
  • सर्वश्रेष्ठ ODI स्कोर: 145* (ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ)

उन्होंने वर्ल्ड कप 2025 में 289 रन बनाए, जिसमें ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शतक शामिल था। औसत रहा 57.80 — जो यह दिखाता है कि उन्होंने आखिरी टूर्नामेंट भी शिखर प्रदर्शन के साथ खत्म किया


क्रिकेट से बाहर भी एक प्रेरणा

डिवाइन ने केवल मैदान पर नहीं, बल्कि उसके बाहर भी एक उदाहरण पेश किया। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य के लिए खुलकर बात की, टाइप-1 डायबिटीज के साथ खेलते हुए अनगिनत युवाओं को प्रेरित किया और साबित किया कि खेल में मन की मजबूती उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी शारीरिक फिटनेस।

वे कई बार अपने स्कूलों और कम्युनिटी इवेंट्स में जाकर युवाओं से कहती हैं —

“जीवन में जीत से ज्यादा जरूरी है खुद पर विश्वास रखना।”


न्यूज़ीलैंड की नई प्रतिभाएँ — डिवाइन का विश्वास

डिवाइन ने अपने आखिरी इंटरव्यू में कहा कि अब टीम में नई प्रतिभाएँ उभर रही हैं।

“हमें याद रखना होगा कि ये चीज़ें रातों-रात नहीं होतीं। हम भारत जैसे देश नहीं हैं जहाँ एक अरब लोग क्रिकेट खेलते हों। हमारे पास पाँच मिलियन की आबादी है और यहाँ क्रिकेट अभी भी नंबर वन खेल नहीं है। लेकिन जो अवसर हैं, वे बेहद उत्साहजनक हैं।”

उनका मानना है कि अब ब्रूक हॉलिडे (29) और जॉर्जिया प्लिमर (21) जैसी खिलाड़ी भविष्य की उम्मीद हैं।


डिवाइन के बिना वाइट फर्न्स — नई कहानी की शुरुआत

वाइट फर्न्स के लिए यह बदलाव का दौर होगा। बेट्स और डिवाइन के जाने के बाद टीम को नए चेहरे और नई सोच की जरूरत होगी। लेकिन डिवाइन की छोड़ी हुई संस्कृति — समर्पण, ईमानदारी और जोश — हमेशा इस टीम की पहचान बनी रहेगी।


एक दिन जो इतिहास बन गया

26 अक्टूबर 2025 का दिन केवल एक मैच का नहीं, बल्कि एक युग के अंत का दिन था।
सोफी डिवाइन ने भले कहा हो कि “क्रिकेट मुझे कुछ नहीं देता,”
लेकिन हकीकत यह है कि क्रिकेट हमेशा उनके प्रति ऋणी रहेगा।

उनकी हिम्मत, सादगी, नेतृत्व और खेल के प्रति प्रेम ने उन्हें सिर्फ न्यूज़ीलैंड नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे प्रेरणादायक खिलाड़ियों में शामिल कर दिया है।

“यह सिर्फ एक अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है,” उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा।


निष्कर्ष

सोफी डिवाइन की विदाई एक यादगार पल रही — आँसुओं से भरी, लेकिन गर्व से चमकती हुई।
उनकी कहानी बताती है कि सच्चे खिलाड़ी वो होते हैं जो जीत या हार से परे जाकर खेल को सम्मान देते हैं।

19 वर्षों का उनका सफर उन तमाम युवा खिलाड़ियों के लिए एक संदेश है कि खेल सिर्फ मैदान पर नहीं, बल्कि मन के भीतर भी खेला जाता है।

न्यूज़ीलैंड की यह “क्रिकेट क्वीन” भले ODI से अलविदा कह चुकी हो, लेकिन उनकी छाप हर विकेट, हर चौके और हर मुस्कुराहट में हमेशा रहेगी।


स्रोत: Raj Daily News – https://rajdailynews.in