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सीकर। राजस्थान के सीकर शहर के फतेहपुरी गेट स्थित ऐतिहासिक श्रीविजय गणेश मंदिर अब नए और भव्य स्वरूप में नजर आएगा। करीब 243 साल पुराने इस मंदिर का पहली बार बड़े स्तर पर जीर्णोद्धार किया जा रहा है। मंदिर के नए स्वरूप के निर्माण की शुरुआत के लिए भूमि पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें संत-महात्माओं, जनप्रतिनिधियों, व्यापारियों और शहर के गणमान्य लोगों ने हिस्सा लिया।
जीर्णोद्धार के बाद मंदिर को तीन मंजिला बनाया जाएगा और इसकी ऊंचाई करीब 33 फीट होगी। मंदिर के निर्माण में मार्बल पत्थर का इस्तेमाल किया जाएगा। योजना के अनुसार दीपावली से पहले ग्राउंड फ्लोर का काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। मंदिर के दूसरे तल पर भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित की जाएगी, जबकि वर्तमान में विराजमान भगवान गणेश की मूर्ति को यथास्थान रखा जाएगा।

श्रीविजय गणेश मंदिर केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं है, बल्कि इससे सीकर के इतिहास और शौर्य की एक रोचक कहानी भी जुड़ी हुई है। गणेश चतुर्थी के अलावा प्रत्येक बुधवार को यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर के विस्तार और जीर्णोद्धार का निर्णय लिया गया है।
भूमि पूजन के साथ शुरू हुआ नए मंदिर का निर्माण
फतेहपुरी गेट स्थित श्रीविजय गणेश मंदिर में नए जीर्णोद्धार कार्य के लिए भूमि पूजन किया गया। पालवास धाम के चंद्रमादास महाराज, बऊ धाम के ओमनाथ महाराज और ताराचंद पुजारी ने मंत्रोच्चार के साथ भूमि पूजन की धार्मिक प्रक्रिया संपन्न कराई।
इस अवसर पर सीकर विधायक राजेंद्र पारीक, पूर्व विधायक रतनलाल जलधारी, पूर्व सभापति जीवण खां सहित कई जनप्रतिनिधि, व्यापारी और शहर के गणमान्य लोग मौजूद रहे।
भूमि पूजन के साथ ही मंदिर को नया स्वरूप देने की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। पुराने मंदिर की धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान को बनाए रखते हुए इसे श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के अनुरूप विकसित करने की योजना है।
तीन मंजिला होगा नया श्रीविजय गणेश मंदिर
मंदिर के जीर्णोद्धार के बाद इसका स्वरूप पहले की तुलना में काफी भव्य होगा। जानकारी के अनुसार नया मंदिर तीन मंजिला बनाया जाएगा और इसकी ऊंचाई लगभग 33 फीट रहेगी।
मंदिर के निर्माण में मार्बल पत्थर का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे मंदिर को नया और आकर्षक स्वरूप मिलने की उम्मीद है। निर्माण योजना के तहत सबसे पहले ग्राउंड फ्लोर का काम पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है।
मंदिर प्रबंधन के अनुसार दीपावली से पहले ग्राउंड फ्लोर का निर्माण पूरा करने की योजना है। इसके बाद मंदिर के अन्य हिस्सों के निर्माण और विकास का काम आगे बढ़ाया जाएगा।
तीन मंजिला मंदिर बनने के बाद श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध स्थान बढ़ेगा और धार्मिक आयोजनों के दौरान आने वाली भीड़ को व्यवस्थित करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
दूसरे तल पर स्थापित होगी भगवान शिव की प्रतिमा
नए मंदिर की सबसे खास बातों में से एक यह होगी कि इसके दूसरे फ्लोर पर भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित की जाएगी।
वहीं मंदिर में वर्तमान में विराजमान भगवान गणेश की प्रतिमा को हटाया नहीं जाएगा। भगवान गणेश की मूल प्रतिमा यथास्थान रहेगी।
इस तरह नए निर्माण के बावजूद मंदिर की मूल धार्मिक पहचान को बरकरार रखने की योजना है।
मंदिर से जुड़े लोगों के अनुसार इसका मुख्य उद्देश्य केवल भवन का विस्तार करना नहीं है, बल्कि वर्षों से चली आ रही धार्मिक परंपरा और श्रद्धालुओं की आस्था को बनाए रखते हुए मंदिर को सुविधाजनक स्वरूप देना है।
क्यों पड़ा मंदिर का नाम ‘श्रीविजय गणेश’?
श्रीविजय गणेश मंदिर की पहचान सिर्फ इसकी प्राचीनता के कारण नहीं है। मंदिर के नाम के पीछे भी एक ऐतिहासिक कथा बताई जाती है।
मंदिर से जुड़ी जानकारी के अनुसार, सीकर के तत्कालीन शासक राव राजा देवी सिंह के समय यह क्षेत्र युद्ध की परिस्थितियों से गुजर रहा था। राव राजा देवी सिंह का कासली के राजा से युद्ध चल रहा था।
कहा जाता है कि सीकर की सेना ने शुरुआती दो युद्धों में हार का सामना किया। सेना ने भरपूर शौर्य और पराक्रम दिखाया, लेकिन इसके बावजूद दोनों युद्धों में विजय हासिल नहीं हो सकी।
ऐसे समय में राजा के दरबारियों ने कासली की गणेश प्रतिमा को लाकर स्थापित करने की बात कही।
राजा ने दरबारियों की सलाह स्वीकार की और इसके बाद भगवान गणेश की प्रतिमा को यहां लाने का निर्णय लिया गया।
तीसरे युद्ध से जुड़ी है विजय की कहानी
कहा जाता है कि जब तीसरा युद्ध चल रहा था, उसी दौरान कासली से भगवान गणेश की प्रतिमा को यहां लाया गया।
प्रतिमा को सीकर के किले के उत्तरी गेट में प्रवेश करते ही स्थापित किया गया। इसके बाद हुए युद्ध में सीकर की सेना ने विजय हासिल की।
इसी मान्यता के कारण भगवान गणेश को ‘श्रीविजय गणेश’ कहा जाने लगा।
यही वजह है कि इस मंदिर का धार्मिक महत्व सीकर के लोगों के साथ-साथ शहर के इतिहास से भी जुड़ा हुआ माना जाता है।
हालांकि इस ऐतिहासिक कथा से जुड़े विवरण स्थानीय परंपरा और मंदिर से प्राप्त जानकारी पर आधारित हैं, इसलिए अलग-अलग ऐतिहासिक स्रोतों में इसके विवरण में अंतर संभव है।
मंदिर की स्थापना को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी
मंदिर से जुड़ी उपलब्ध जानकारी में इसकी स्थापना को लेकर एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आता है। मंदिर की वर्तमान पहचान से जुड़े विवरण के अनुसार यहां भगवान गणेश की प्रतिमा की स्थापना राव राजा कल्याण सिंह के परदादा राव राजा देवी सिंह से जोड़ी जाती है।
बताया जाता है कि यह घटना सीकर के पुराने राजघराने और उस दौर के युद्धों से जुड़ी हुई थी।
हालांकि उपलब्ध विवरण में मंदिर की स्थापना के वर्ष को लेकर एक असंगति भी दिखाई देती है। मंदिर को करीब 243 वर्ष पुराना बताया गया है, जबकि स्थापना का वर्ष 1840 भी उल्लेखित किया गया है। 1840 से 2026 तक की अवधि लगभग 186 वर्ष होती है। इसलिए मंदिर की वास्तविक स्थापना तिथि को लेकर प्रमाणित ऐतिहासिक अभिलेखों से पुष्टि किया जाना जरूरी है।
यह अंतर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी ऐतिहासिक मंदिर की आयु बताने में वर्ष और स्रोत दोनों का स्पष्ट होना आवश्यक है। राज डेली न्यूज के लिए प्रकाशित खबर में इस तथ्य को सावधानी से प्रस्तुत करना उचित होगा।
झाझला पत्थर और चिकनी मिट्टी से बनी है प्रतिमा
श्रीविजय गणेश मंदिर की वर्तमान प्रतिमा भी अपने आप में खास बताई जाती है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार भगवान गणेश की प्रतिमा झाझला पत्थर और चिकनी मिट्टी से बनी हुई है।
कई वर्षों से श्रद्धालु इस प्रतिमा के दर्शन करते आ रहे हैं। मंदिर की प्राचीनता और इससे जुड़ी ऐतिहासिक कथा के कारण स्थानीय लोगों के बीच इसकी विशेष धार्मिक मान्यता है।
नए मंदिर का निर्माण होने के बावजूद भगवान गणेश की वर्तमान प्रतिमा को उसी स्थान पर रखने की योजना है। इससे नए भवन के साथ पुराने मंदिर की धार्मिक पहचान भी बनी रहेगी।
बुधवार को भी उमड़ते हैं श्रद्धालु
श्रीविजय गणेश मंदिर में विशेष रूप से गणेश चतुर्थी के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसके अलावा प्रत्येक बुधवार को भी मंदिर में भक्तों की अच्छी भीड़ रहती है।
भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देव माना जाता है और बुधवार को गणेश पूजा के लिए विशेष दिन के रूप में भी कई श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं।
सीकर शहर के फतेहपुरी गेट क्षेत्र में स्थित होने के कारण मंदिर तक पहुंचना भी श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक है। लंबे समय से यह मंदिर स्थानीय धार्मिक जीवन का हिस्सा रहा है।
समय के साथ शहर का विस्तार हुआ और मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ती गई। इसी बढ़ती भीड़ को देखते हुए अब मंदिर के विस्तार और जीर्णोद्धार की आवश्यकता महसूस की गई।
बढ़ती भीड़ बनी जीर्णोद्धार की बड़ी वजह
मंदिर के पुजारी पवन पुजारी के अनुसार श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर का जीर्णोद्धार किया जा रहा है।
गणेश चतुर्थी जैसे विशेष अवसरों पर मंदिर में बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। ऐसे में मौजूदा भवन और उपलब्ध स्थान पर भीड़ को व्यवस्थित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
नए तीन मंजिला भवन के निर्माण से मंदिर परिसर में उपलब्ध जगह का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसके साथ ही भविष्य में धार्मिक आयोजनों और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अतिरिक्त स्थान उपलब्ध होने की उम्मीद है।
दीपावली से पहले ग्राउंड फ्लोर पूरा करने का लक्ष्य
जीर्णोद्धार योजना में निर्माण कार्य को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की तैयारी है। सबसे पहले ग्राउंड फ्लोर का काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
मंदिर से जुड़ी जानकारी के अनुसार दीपावली से पहले ग्राउंड फ्लोर का काम पूरा करने की योजना है।
इसके बाद ऊपर के तल और अन्य निर्माण कार्यों को पूरा किया जाएगा। मंदिर के पूर्ण रूप से तैयार होने के बाद इसका स्वरूप वर्तमान भवन की तुलना में काफी अलग और भव्य दिखाई देगा।
पुरानी आस्था और नया स्वरूप एक साथ
श्रीविजय गणेश मंदिर के जीर्णोद्धार की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यहां नया निर्माण होने के बावजूद मंदिर की मूल धार्मिक पहचान को बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।
भगवान गणेश की वर्तमान प्रतिमा को यथास्थान रखने का निर्णय इसी दिशा में महत्वपूर्ण है।
एक ओर मंदिर का भवन मार्बल से तैयार होकर आधुनिक और भव्य रूप लेगा, वहीं दूसरी ओर वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रही गणेश प्रतिमा उसी स्थान पर विराजमान रहेगी।
दूसरे तल पर भगवान शिव की प्रतिमा की स्थापना के बाद मंदिर परिसर में धार्मिक दृष्टि से भी एक नया आयाम जुड़ जाएगा।
सीकर की विरासत में मंदिर की अलग पहचान
सीकर की पहचान केवल शिक्षा और व्यापार के लिए ही नहीं, बल्कि उसके ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों के कारण भी है। पुराने किले, हवेलियां, मंदिर और धार्मिक स्थल शहर की विरासत का हिस्सा हैं।
फतेहपुरी गेट का श्रीविजय गणेश मंदिर भी इसी विरासत का एक हिस्सा माना जाता है।
इस मंदिर की खासियत यह है कि यहां धर्म और स्थानीय इतिहास की कहानियां एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। भगवान गणेश की प्रतिमा से जुड़ी विजय की कथा आज भी स्थानीय लोगों के बीच प्रचलित है।
अब जब मंदिर का जीर्णोद्धार शुरू हो चुका है, तो आने वाले समय में यह स्थान धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ सीकर की ऐतिहासिक पहचान के एक महत्वपूर्ण स्थल के रूप में भी और अधिक चर्चा में आ सकता है।
243 साल पुराने मंदिर के जीर्णोद्धार से क्या बदलेगा?
जीर्णोद्धार के बाद मंदिर में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेंगे।
- मंदिर का नया भवन तीन मंजिला होगा।
- भवन की ऊंचाई करीब 33 फीट होगी।
- निर्माण में मार्बल पत्थर का इस्तेमाल किया जाएगा।
- दूसरे तल पर भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित की जाएगी।
- भगवान गणेश की वर्तमान प्रतिमा को यथास्थान रखा जाएगा।
- श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के अनुसार मंदिर का विस्तार किया जाएगा।
- दीपावली से पहले ग्राउंड फ्लोर का निर्माण पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
सीकर के लोगों के लिए क्यों खास है यह मंदिर?
किसी भी पुराने धार्मिक स्थल की पहचान केवल उसकी इमारत से नहीं होती। उसके साथ जुड़ी परंपराएं, मान्यताएं और लोगों की आस्था उसे खास बनाती हैं।
श्रीविजय गणेश मंदिर के साथ भी ऐसा ही है। लंबे समय से सीकर के लोग यहां भगवान गणेश के दर्शन के लिए पहुंचते रहे हैं।
मंदिर से जुड़ी विजय की ऐतिहासिक कथा, पुरानी गणेश प्रतिमा और फतेहपुरी गेट की लोकेशन इसे शहर के धार्मिक और ऐतिहासिक परिदृश्य में अलग पहचान देती है।
अब जीर्णोद्धार के बाद जब मंदिर तीन मंजिला और 33 फीट ऊंचे स्वरूप में तैयार होगा, तो इसका बाहरी स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा। लेकिन मंदिर की सबसे पुरानी और महत्वपूर्ण पहचान—भगवान गणेश की प्रतिमा—यथास्थान बनी रहेगी।
अब नजर निर्माण कार्य पूरा होने पर
भूमि पूजन के साथ मंदिर के नए स्वरूप की शुरुआत हो चुकी है। अब आने वाले महीनों में निर्माण कार्य किस गति से आगे बढ़ता है और निर्धारित समय के अनुसार ग्राउंड फ्लोर कब तक तैयार होता है, यह देखने वाली बात होगी।
यदि निर्माण योजना के अनुसार काम पूरा होता है तो आने वाले समय में फतेहपुरी गेट स्थित श्रीविजय गणेश मंदिर सीकर शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में एक नए और भव्य स्वरूप में नजर आएगा।
पुरानी आस्था, ऐतिहासिक कहानी और आधुनिक निर्माण—श्रीविजय गणेश मंदिर का नया स्वरूप इन तीनों को एक साथ जोड़ने की कोशिश है।
